उम्मीदें
आज मैं उम्मींद (expectation) पर अपनी कुछ सोच साझा कर रहा हूं जब कोई व्यक्ति किसी से जुड़ता है किसी भी रिश्ते से चाहे वो दोस्ती हो या प्यार हो तो एक चीज जो सबसे ज्यादा उसके मन मे आती है उस समय वो होती है उम्मींद ये भले ही साढ़े तीन अक्षर का शब्द है पर इससे पता नहीं कितना सारी बातें इनमे होती है एक दूसरे की फ़िक्र करना एक दूसरे के काम आना कभी अच्छे और बुरे waqt का साथी बनना पता नहीं ऐसी कितना सारे विचार उस व्यक्ति को लेकर आते है दोनों लोगों के बीच मे और मुझे ये लगता है कि उम्मींद किसी से होना स्वाभाविक है अगर आप एक दूसरे से लगाव होता है, आप उस व्यक्ति का भरोसा के काबिल बनते है इंतजार करते है आप उसका हर काम मे राय लेने मे कुछ सोचने मे जब आप खुदको इतना विश्वास बनाते है कि सामने वाला इंसान से मुझे कोई भी दिक्कत नहीं होगी कभी और जितना फिक्र मेरा karta है आगे भी करेगा और हम दोनों के बीच हमेशा ही ऐसा रहने वाला है ; ये सही चीज भी है होना भी चाहिए पर मेरी मानना ये है कि आप एक इंसान से इतना उम्मीद लगाना सही भी है पर इतना ध्यान जरूर रहना चाहिए कि वो भी "इंसान" है...