उम्मीदें
आज मैं उम्मींद (expectation) पर अपनी कुछ सोच साझा कर रहा हूं
जब कोई व्यक्ति किसी से जुड़ता है किसी भी रिश्ते से चाहे वो दोस्ती हो या प्यार हो
तो एक चीज जो सबसे ज्यादा उसके मन मे आती है उस समय वो होती है उम्मींद ये भले ही साढ़े तीन अक्षर का शब्द है पर इससे पता नहीं कितना सारी बातें इनमे होती है
एक दूसरे की फ़िक्र करना एक दूसरे के काम आना कभी अच्छे और बुरे waqt का साथी बनना पता नहीं ऐसी कितना सारे विचार उस व्यक्ति को लेकर आते है
दोनों लोगों के बीच मे और मुझे ये लगता है कि उम्मींद किसी से होना स्वाभाविक है अगर आप एक दूसरे से लगाव होता है, आप उस व्यक्ति का भरोसा के काबिल बनते है
इंतजार करते है आप उसका हर काम मे राय लेने मे कुछ सोचने मे जब आप खुदको इतना विश्वास बनाते है कि सामने वाला इंसान से मुझे कोई भी दिक्कत नहीं होगी कभी और जितना फिक्र मेरा karta है आगे भी करेगा
और हम दोनों के बीच हमेशा ही ऐसा रहने वाला है ;
ये सही चीज भी है होना भी चाहिए पर मेरी मानना ये है कि आप एक इंसान से इतना उम्मीद लगाना सही भी है पर इतना ध्यान जरूर रहना चाहिए कि वो भी "इंसान" है
"इंसान " से गलती होती है तो अगर आप इतना उम्मीद किया है तो एक बार ये बात भी ध्यान रखना चाहिए कि गलती करना मानव की प्रकृति मे है तो उसे इतना ना उम्मीद बढ़ा ले कि उसकी किसी भी गलती पर माफ़ ना कर पाए
उम्मीदें एक चीज और लेकर आती है रिस्तों मे कि जब सबकुछ तुम्हें पता था मेरे बारे मे तो तुमने कैसे गलती कर दिया
और ये दोनों तरफ होता है फिर वहीं की एकदूसरे से बात करना बंद कर देते है जिससे उनके बीच मे और भी चीज खराब होने लगती है काफी सारी गलतफहमियां आजाती है और ये भी सोचने लगते है कि मैं क्यूँ जाऊँ मनाने
जबकि इसका ख्याल भी नई आना चाहिए मैं की बिल्कुल भी भावना नहीं होनी चाहिए
क्योंकि सबसे जरूरी है "रिश्ता " जो कि दोनों का होता है तो उसको बचाने के लिए एक दूसरे की थोड़ा झुकना चाहिए
क्योंकि किसी से इतना अच्छा रिसता बनाना विश्वास जीतना bahut समय लग जाता है
और सिर्फ अपने आप को थोड़ा सा झुककर बात करके अगर रिश्ते बचे तो बिल्कुल बचाने की कोशिश करनी चाहिए
बात करने से ही पता चलता है कि जो चीज हम दोनों ने सोच ली उतना कुछ tha भी नहीं
बहुत छोटी बातों से इतना बड़ा दरार आकर रिश्ते खत्म hojate है
दूरिया बढ़ाने से aacha है उसपर बात करे जो भी मन मे हो तो
उम्मीद रखे जरूर पर ये भी याद रखे कि इंसान है सबसे गलती hojati है
जरूरी नहीं आप जिस तरह सोचे वैसे ही सामने वाला माफ़ी मन या प्रयास करे तभी आप भी आगे बात करेंगे
अगर सच मे दिखता है कि वो इंसान चाह रहा है तो जरूर usse baat kre और रिश्ते को बचाए
क्योंकि रिश्ते बहुत खास होते है
इसी के साथ यही पर विराम आगे fir मिलेंगे,,,,
अधूरे अल्फाज.
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